शेयर बाज़ार में तकनीकी विश्लेषण (technical analysis) करने वाले निवेशक अक्सर "डेथ क्रॉस" शब्द का इस्तेमाल करते हैं। यह तब बनता है जब किसी शेयर का 50-दिन का मूविंग एवरेज (50-DMA) उसके 200-दिन के मूविंग एवरेज (200-DMA) से नीचे चला जाता है। परंपरागत रूप से इसे एक मंदड़िया (bearish) संकेत माना जाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि शेयर का अल्पकालिक औसत मूल्य दीर्घकालिक औसत से कमज़ोर हो रहा है।
हाल ही में ICICI बैंक के चार्ट को लेकर बाज़ार में यह चर्चा है कि इसमें डेथ क्रॉस बन सकता है या बन चुका है। हालांकि, इस तरह के तकनीकी संकेतों की पुष्टि हमेशा जीवंत (live) चार्ट डेटा से करनी चाहिए, क्योंकि मूविंग एवरेज रोज़ बदलते रहते हैं और अलग-अलग डेटा स्रोतों में मामूली अंतर भी देखने को मिल सकता है।
यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि डेथ क्रॉस बनना अपने आप में भविष्य की कीमत का कोई गारंटीशुदा संकेतक नहीं है। यह एक पिछड़ा हुआ (lagging) संकेतक है, यानी यह पिछली कीमतों के आधार पर बनता है, भविष्य की गारंटी नहीं देता। कई बार डेथ क्रॉस बनने के बावजूद शेयर उलटा ऊपर चला जाता है, और कई बार गोल्डन क्रॉस के बाद भी गिरावट जारी रहती है। इसलिए अनुभवी निवेशक इसे अकेले आधार बनाकर निर्णय नहीं लेते, बल्कि कंपनी के बुनियादी वित्तीय आंकड़ों (fundamentals), व्यापक बाज़ार की स्थिति, और अन्य तकनीकी संकेतकों के साथ मिलाकर देखते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। हम किसी भी शेयर को खरीदने, बेचने, पुट/कॉल ऑप्शन लेने या फ्यूचर्स में पोज़ीशन बनाने की सलाह नहीं देते। किसी भी निवेश निर्णय से पहले कृपया लाइव मार्केट डेटा स्वयं जांचें और सेबी-पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
No comments yet. Be the first to share your thoughts.